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Monday, April 14, 2008

छह माह में होगा सभी प्रादेशिक कमोडिटी एक्सचेंजों का कापरेरेटाइजेशन

मुंबई. शेयर बाजार के बाद अब देश के सभी कमोडिटी एक्सचेंजों का डिम्युच्युलाइजेशन/कापरेरेटाइजेशन किया जाएगा। अगले 6 महीनों में देश के लगभग 22-23 कमोडिटी एक्सचेंजों को अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए डिम्युच्युलाइजेशन करना होगा। इसके बाद अगले 6 से 12 माहीनों में राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे नए एक-दो कमोडिटी एक्सचेंज भी स्थापित किए जाने की योजना है।

देशभर में वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की चर्चा के बीच कमोडिटी बाजार नियामक फारवर्ड मार्केट कमीशन (एफएमसी) फ्यूचर ट्रेडिंग पर पाबंदी लगाने के पक्ष में नहीं है। एफएमसी चैयरमेन बी.सी. खटुआ ने बताया कि प्रादेशिक कमोडिटी बाजारों का डिम्युच्युलाइजेशन करने के लिए छह माह का समय दिया गया है। उन्होंने बताया कि एफसीआरए नियमों में सुधार के बाद एफएमसी इस बारे में विस्तृत दिशानिर्देश जारी करेगा। इसमें मुख्य प्रवर्तक का हिस्सा सबसे बड़ा रखा जाएगा, जबकि अन्य सदस्यों का हिस्सा सीमित होगा।

खटुआ के मुताबिक नए दिशानिर्देशों में ट्रेडिंग, ऑनरशिप और मैनेजमेंट अधिकारों को अलग कर दिया जाएगा। इससे कमोडिटी एक्सचेंज का संचालन स्वतंत्र और पारदर्शक रूप में हो सकेगा। उन्होंने बताया कि डिम्युच्युलाइजेशन और राष्ट्रीय स्तर पर कार्यरत एक्सचेंज के लिए योजना तैयार की जा रही है साथ ही आगामी वर्ष में नए 2-1 कमोडिटीज एक्सचेंज स्थापित किए जाने की योजना है।

क्या तर्क: पिछले वर्ष तुअर, गेंहू और चावल के वायदा कारोबार पर पाबंदी लगाने के बाद भी इन जिंसों की कीमतों में कमी नहीं आई बल्कि और बढ़े हैं।

आम और संतरे के रस में भी वायदा:

कमोडिटी बाजार नियामक एफएमसी कुछ नई जिंसों में भी वायदा कारोबार शुरू करने की संभावनाएं तलाश रहा है। आने वाले समय में आप आम, टमाटर और संतरे के रस के अलावा काजू, किशमिश जैसे ड्रायफ्रूट और एथेनॉल जैसे बाय-प्रोडक्ट में वायदा सौदे होते देख सकते हैं।

एफएमसी चैयरमेन बी.सी. खटुआ ने बताया कि विश्व बाजार की तुलना में भारत में फिलहाल कई जिंसों में वायदा कारोबार नहीं हो रहा है। आम और संतरे के रस का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि अमेरिका में संतरे के गूदे (पल्प) में बड़े पैमाने पर वायदा कारोबार होता है।

खटुआ के मुताबिक मेटल में प्लेटिनम, मसाले, बारह महीने मिलने वाले फल, कच्ची चीनी, एथेनॉल, लंबे समय तक संग्रहित की जा सकने वाली सब्जियां, सेब, आम, टमाटर और संतरे जैसे फलों के गूदे में भी वायदा कारोबार शुरू किया जा सकता है।

Monday, March 24, 2008

शेयर बाजार की अच्छी शुरुआत

हल्की बढ़त पर खुलने के बाद अब शेयर बाजार में तेजी आती नजर रही है। बड़े शेयरों में खासी तेजी है और इनमें अच्छी खरीदारी देखी जा रही है। इस समय सेंसेक्स 138.94 अंक ऊपर कारोबार कर रहा है और निफ्टी 17.15 अंक ऊपर है।

एशियाई बाजार भी आज अच्छे खुले। ताइवान का शेयर बाजार 4.05 % बढ़ा जबकि जापान का निक्केई 0.37% बढ़ा। सिंगापूर का शेयर बाजार 2.34% बढ़त पर था। दक्षिण कोरिया के बाजार में 0.44% बढ़त देखी गई।


अमेरिकी शेयर बाजारों में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती और कमोडिटी कीमतों में कमी के कारण अच्छा उछाल आया था। डाओ जोंस में 261.66 अंकों की बढ़ोतरी हुई और नैस्डैक में 48.15 अंकों की वृद्धि हुई थी।

9.55 बजे

आज मुंबई शेयर बाजार का सेंसेक्स 149 अंक ऊपर 15,144 के स्तर पर खुला। और राष्ट्रीय शेयर बाजार का निफ्टी 30 अंक ऊपर 4,604 के स्तर पर खुला।

इस दौरान बढ़ने वाले शेयरों की संख्या 1076 थी, जबकि गिरने वाले शेयरों की संख्या 1899 थी। हालांकि 84 शेयरों में कोई बदलाव नजर नहीं रहा था।

बढ़ने वाले शेयरों में हिंडाल्को, एबीबी, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल, सुजलॉन, ओएनजीसी, हीरो होंडा और आईटीसी शामिल थे।

गिरने वाले शेयरों में कैर्न इंडस्ट्रीज, रिलायंस इंडस्ट्रीज, रिलायंस कम्यूनिकेशन शामिल है।

Thursday, March 13, 2008

‘सीटीटी’ से नहीं टूटा कमोडिटी कारोबार

कमोडिटी कारोबार परट्रांजैक्शनकर (सीटीटी) लगाए जाने के ऐलान के बाद भी कारोबारियों का रुझान कारोबार में कम नहीं हुआ है। उल्टे कमोडिटी एक्सचेंज पर कारोबार और बढ़ने लगा है।

हालांकि जानकारों का कहना है कि पहली अप्रैल से सीटीटी लागू होने के बाद भी वॉल्यूम (मात्रा) पर लम्बे समय तक कोई असर नहीं पड़ने वाला है।

बजट में जब वित्त मंत्री ने सीटीटी लगाने का ऐलान किया तो तमाम कमोडिटी एक्सचेंज इसके खिलाफ हो गए। यह पहली अप्रैल से लागू किया जाना प्रस्तावित है। फिर भी यह माना जा रहा था कि सीटीटी लागू होने से पहले ही कारोबारी एक्सचेंज से हाथ खींचने लगेंगे। लेकिन उल्टे एक्सचेंज में कारोबार और बड़े पैमाने पर होने लगा है।

मसलन फरवरी के पहले आठ दिनों में एमसीएक्स में औसत कारोबार की मात्रा (ट्रेडिंग वॉल्यूम) करीब 13 हजार करोड़ रुपए का रहा।


सीटीटी की घोषणा के बाद मार्च के पहले आठ दिनों में यह औसत वॉल्यूम बढ़कर करीब 15 हजार करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

एनसीडेक्स में तो इस दौरान औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम करीब 88 फीसदी बढ़ गया। जानकारों का कहना है कि सीटीटी लागू होने के बाद भी लम्बे समय तक वॉल्यूम में कोई गिरावट नहीं रहेगी। जबकि कमोडिटी एक्सचेंज की दलील है कि सीटीटी लागू होने से एक लाख रुपए केएक्सचेंज ट्रांजैक्शनपर लगने वाला कर 2 रुपए से बढ़कर करीब 19 रुपए हो जाएगा।

इससे ट्रेडिंग वॉल्यूम में काफी गिरावट आएगी। साथ ही भारत में कमोडिटी एक्सचेंज जब परिपक्व हो जाएं तब कर लगाया जाए। वरना डब्बा ट्रेडिंग जैसे अवैध कारोबार को बढ़ावा मिलेगा।

दुनिया के दूसरे देशों में सीटीटी नहीं लगाया जाता है। ऐसे में भारत में यह कर लगाया जाना सही नहीं है। हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि बीच का रास्ता अपनाना ही बेहतर होगा।

कुछ लोग चाहते हैं कि सीटीटी लगे लेकिन इसका दर कुछ कम हो। लेकिन कमोडिटी एक्सचेंज के नुमाइंदे इसे पूरी तरह हटाने की मांग को लेकर कृषि मंत्री से मिल चुके हैं।