Friday, 2 November 2007
रिलायंस मनी ने शुरू की ऑनलाइन ऐडवाइजरी
वाप्र : रिलायंस मनी ने शेयरधारकों के लिए ऑनलाइन ऐडवाइजरी सेवा की शुरुआत की है। इसके लिए रिलायंस मनी ने रॉयटर्स मेसेजिंग चैट सर्विस से समझौता किया है। कंपनी के सीईओ सुदीप बंदोपाध्याय और रॉयटर्स के साउथ एशिया के डायरेक्टर समीर शाह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बाबत ऐलान किया। रिलायंस मनी के दो लाख से भी ज्यादा उपभोक्ता एक महीने तक मुफ्त इस सेवा का लाभ उठा सकते हैं। इस मौके पर सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि रिलायंस मनी ने यह सुविधा उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रदान की है और हमें उम्मीद है कि यह लोगों को काफी पसंद आएगी।
Thursday, 1 November 2007
ब्याज दरों में कमी जरूरी
नई दिल्ली: रिजर्व बैंक गवर्नर वाई.वी.रेड्डी ने आर्थिक विकास की रफ्तार को बरकरार रखने पर जोर देते हुए कहा कि इसके स्थायित्व को अगर कोई खतरा है तो वह घरेलू कारणों से नहीं बल्कि विदेशी स्रोतों से ज्यादा है।
चालू वित्तीय वर्ष की ऋण एवं मौद्रिक नीति की अर्धवार्षिक समीक्षा जारी करने के बाद वीडियो कान्प्रेंसिंग के जरिए संवाददाताओं के सवालों के जबाव में रेड्डी ने कहा कि ऋण नीति में संशोधन के जो भी नीतिगत कदम उठाए गए हैं उनका उद्देश्य आर्थिक विकास की उच्च रफ्तार को बनाए रखना है।
बैंकों के नकद सुरक्षित अनुपात (सीआरआर) को आधा प्रतिशत बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत करने के प्रभाव स्वरुप ब्याज दरों में वृद्धि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने सीधे कुछ कहने की बजाय कहा कि इस मुद्दे पर कोई भी निर्णय अलग-अलग बैंकों पर निर्भर करता है। इसका मुकाबला हर एक बैंक को अपने ढंग से करना है, उन्हें इस चुनौती का सामना करना होगा।
डॉ.रेड्डी ने बैंकों को सीख देते हुए कहा कि उन्हें कामकाज में अनुचित तरीके नहीं अपनाने चाहिए, कर्ज वसूली के लिए गुंडों की तरह एजेंट का इस्तेमाल किए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बैंकों को अपने ग्राहकों के साथ उचित व्यवहार करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वसूली के मामले में ग्राहकों को परेशान नहीं किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि बैंकों को ब्याज दरें घटने की स्थिति में तुरंत ग्राहकों को इसका लाभ मिलना चाहिए।
आर्थिक विकास की दर को साढ़े आठ प्रतिशत पर बनाए रखने को न्यायपूर्ण बताते हुए डॉ. रेड्डी ने कहा कि यह अनुमान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में और वृद्धि नहीं होने और देश दुनिया में कोई बड़ी उठापटक नहीं होने पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि घरेलू स्थिति में तो ज्यादा बदलाव की आशंका नहीं है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मुख्य तौर पर चार कारण है जिनसे घरेलू अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। पहला कच्चे तेल के दाम में लगातार वृद्धि, दूसरा विदेशी मुद्रा का आगमन बढने से, तीसरा चीनी बाजार जहां कीमतों में भारी वृद्धि का संकेत हैं और अंततः चौथा कारण इसका असर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में महंगाई के रुप में सामने आने के रुप में है।
उन्होंने कहा कि हालांकि विशेषज्ञों का भी मानना है कि विदेशी उठापटक के झटकों को व्यवस्थित करना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है बशर्ते कि उस पर सतत निगाह रखी जाए और निपटने की तैयारी भी होती रहे। उन्होंने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत इस मामले में बेहतर स्थिति में है।
उन्होंने कहा कि मांग और आपूर्ति के बेहतर प्रबंधन से महंगाई को नियंत्रित किया गया है और आगे भी इस पर नजर बनी रहेगी। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से घरेलू तेल कम्पनियों को हो रहे नुकसान के सवाल पर डॉ. रेड्डी ने कहा पेट्रोल, डीजल की कीमतों में कुछ वृद्धि की जरुरत पड़ सकती है, लेकिन इसका महंगाई पर ज्यादा असर नहीं होगा।
डॉ. रेड्डी ने कहा कि देश में विदेशी मुद्रा की भारी आमद को देखते हुए यह जरुरी है कि इसकी खपत क्षमता को बढ़ाया जाए और बारिकी से नजर रखी जाए ताकि आर्थिक तंत्र में स्थायित्व बना रहे। उन्होंने कहा कि उच्च आर्थिक विकास के लिए भी यह जरुरी है।
उन्होंने कहा कि व्यापक आर्थिक मानक रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुरुप ही रहे हैं। कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन पिछले साल से बेहतर रहा है तो उद्योग और सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन भी घोषित अनुमानों के अनुरुप ही रहा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वृद्धि पर उन्होंने कहा कि यह खाद्यान्नों के दाम बढ़ने की वजह से रहा है।
चालू वित्तीय वर्ष की ऋण एवं मौद्रिक नीति की अर्धवार्षिक समीक्षा जारी करने के बाद वीडियो कान्प्रेंसिंग के जरिए संवाददाताओं के सवालों के जबाव में रेड्डी ने कहा कि ऋण नीति में संशोधन के जो भी नीतिगत कदम उठाए गए हैं उनका उद्देश्य आर्थिक विकास की उच्च रफ्तार को बनाए रखना है।
बैंकों के नकद सुरक्षित अनुपात (सीआरआर) को आधा प्रतिशत बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत करने के प्रभाव स्वरुप ब्याज दरों में वृद्धि के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने सीधे कुछ कहने की बजाय कहा कि इस मुद्दे पर कोई भी निर्णय अलग-अलग बैंकों पर निर्भर करता है। इसका मुकाबला हर एक बैंक को अपने ढंग से करना है, उन्हें इस चुनौती का सामना करना होगा।
डॉ.रेड्डी ने बैंकों को सीख देते हुए कहा कि उन्हें कामकाज में अनुचित तरीके नहीं अपनाने चाहिए, कर्ज वसूली के लिए गुंडों की तरह एजेंट का इस्तेमाल किए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि बैंकों को अपने ग्राहकों के साथ उचित व्यवहार करना चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वसूली के मामले में ग्राहकों को परेशान नहीं किया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि बैंकों को ब्याज दरें घटने की स्थिति में तुरंत ग्राहकों को इसका लाभ मिलना चाहिए।
आर्थिक विकास की दर को साढ़े आठ प्रतिशत पर बनाए रखने को न्यायपूर्ण बताते हुए डॉ. रेड्डी ने कहा कि यह अनुमान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में और वृद्धि नहीं होने और देश दुनिया में कोई बड़ी उठापटक नहीं होने पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि घरेलू स्थिति में तो ज्यादा बदलाव की आशंका नहीं है लेकिन अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मुख्य तौर पर चार कारण है जिनसे घरेलू अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। पहला कच्चे तेल के दाम में लगातार वृद्धि, दूसरा विदेशी मुद्रा का आगमन बढने से, तीसरा चीनी बाजार जहां कीमतों में भारी वृद्धि का संकेत हैं और अंततः चौथा कारण इसका असर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में महंगाई के रुप में सामने आने के रुप में है।
उन्होंने कहा कि हालांकि विशेषज्ञों का भी मानना है कि विदेशी उठापटक के झटकों को व्यवस्थित करना ज्यादा मुश्किल काम नहीं है बशर्ते कि उस पर सतत निगाह रखी जाए और निपटने की तैयारी भी होती रहे। उन्होंने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत इस मामले में बेहतर स्थिति में है।
उन्होंने कहा कि मांग और आपूर्ति के बेहतर प्रबंधन से महंगाई को नियंत्रित किया गया है और आगे भी इस पर नजर बनी रहेगी। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से घरेलू तेल कम्पनियों को हो रहे नुकसान के सवाल पर डॉ. रेड्डी ने कहा पेट्रोल, डीजल की कीमतों में कुछ वृद्धि की जरुरत पड़ सकती है, लेकिन इसका महंगाई पर ज्यादा असर नहीं होगा।
डॉ. रेड्डी ने कहा कि देश में विदेशी मुद्रा की भारी आमद को देखते हुए यह जरुरी है कि इसकी खपत क्षमता को बढ़ाया जाए और बारिकी से नजर रखी जाए ताकि आर्थिक तंत्र में स्थायित्व बना रहे। उन्होंने कहा कि उच्च आर्थिक विकास के लिए भी यह जरुरी है।
उन्होंने कहा कि व्यापक आर्थिक मानक रिजर्व बैंक के अनुमान के अनुरुप ही रहे हैं। कृषि क्षेत्र का प्रदर्शन पिछले साल से बेहतर रहा है तो उद्योग और सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन भी घोषित अनुमानों के अनुरुप ही रहा है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में वृद्धि पर उन्होंने कहा कि यह खाद्यान्नों के दाम बढ़ने की वजह से रहा है।
पेट्रोल-डीजल महंगा करने की सिफारिश
नई दिल्ली: पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी कम्पनी इंडियन ऑयल कार्पोरेशन ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के रिकॉर्ड तोड़ दाम को देखते हुए घरेलू बाजार में भी पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ाने का आग्रह किया है।
इंडियन ऑयल अध्यक्ष सार्थक बेहुरिया ने कहा कि सरकार और तेल कम्पनियां तो बढ़ते दाम से पड़ने वाले बोझ को वहन कर रही हैं लेकिन जनता से इसकी वसूली नहीं की जा रही है। सरकारी फॉर्मूले के मुताबिक जनता से भी कुल नुकसान की एक-तिहाई घाटे की वसूली की जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि तेल कम्पनियों को पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और मिट्टी तेल की घटे दाम पर बिक्री से इस साल 55,000 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब अंतर्राष्ट्रीय तेल कम्पनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं और शेयर बाजार नित नए कीर्तिमान बना रहा है, घरेलू पेट्रोलियम मार्केटिंग कम्पनियां मुनाफा दर्ज करने के लिए सरकारी बॉन्ड पर निर्भर हैं और उनके शेयर मंदी में चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडियन ऑयल की बाजार उधारी 28,000 करोड़ रुपए पर चल रही है, जबकि उसके सामने 12,000 करोड़ रुपए तक की योजनाएं लम्बित पड़ी हैं।
घरेलू पेट्रोलियम विपणन कम्पनियों की वर्तमान स्थिति पर खेद जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ‘बॉन्ड पत्र’ नहीं बल्कि नकदी चाहिए। सरकार ने तेल कम्पनियों के नुकसान की भरपाई के लिए जो फार्मूला तैयार किया है उसमें जनता के हिस्से में भी एक-तिहाई बोझ डाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में इंडियन ऑयल को पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से रोजाना करीब 100 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है और यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने का सिलसिला जारी रहता है तो नवम्बर से दैनिक नुकसान 120 करोड़ रुपए पर पहुंच जाएगा।
बेहुरिया ने कहा कि तेल कम्पनियों को वर्तमान मूल्यों पर पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से पेट्रोल पर 3.90 रुपए, डीजल पर 6.22 रुपए, मिट्टी तेल पर 15.99 रुपए प्रति लीटर और रसोई गैस सिलेंडर पर 174.17 रुपए प्रति सिलेंडर का नुकसान हो रहा है।
जिस तेजी से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं और भारतीय खरीद मूल्य में भी वृद्धि हो रही है उसे देखते हुए नवम्बर में ‘अंडर रिकवरी’ पेट्रोल पर करीब चार रुपए, डीजल पर साढ़े छह रुपए, मिट्टी तेल पर करीब साढ़े सोलह रुपए और घरेलू गैस सिलेंडर पर 200 रुपए के पार चली जाएगी।
बेहुरिया ने कहा कि कम्पनी का रिफाइनरी मार्जिन दूसरी तिमाही में करीब छह डॉलर प्रति बैरल रहा है जबकि पिछले साल इस तिमाही में यह आधा डॉलर से भी कम था। पहली छमाही में यह पिछले साल के 3.13 डॉलर के मुकाबले इस साल 8.44 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
कम्पनी के पाइपलाइन नेटवर्क में भी अच्छी कमाई हुई है इसके अलावा सरकार की तरफ से पहली छमाही में नुकसान की भरपाई के लिए 6,362.25 करोड़ रुपए के बॉन्ड जारी करने का भरोसा मिला है इन सबकी बदौलत कम्पनी को दूसरी तिमाही में 3,818 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ है जबकि पिछले साल उसे इस अवधि में 2,884 करोड़ रुपए का लाभ हुआ था। बॉन्ड मिलने की बदौलत यह वृद्धि 32 प्रतिशत की रही है। अप्रैल से सितम्बर की पूरी छमाही में कम्पनी का मुनाफा 25.7 प्रतिशत बढ़कर 5,286 करोड़ रुपए हो गया।
कम्पनी की दूसरी तिमाही में कुल कमाई पिछले साल के 50,357 करोड़ रुपए के मुकाबले घटकर 49,786 करोड़ रुपए रह गई। लेकिन अन्य आय के मद में 1,270 करोड़ रुपए मिलने और ब्याज अदायगी में मामूली कमी आने तथा 6,362.25 करोड़ रुपए की बॉन्ड राशि शामिल कर लिए जाने के बाद कम्पनी ने मुनाफा अर्जित कर लिया है।
बेहुरिया ने कहा कि सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है, पेट्रोलियम उत्पादों की पूरी दुनिया में खपत बढ़ जाती है, तेल कम्पनियां अपने हिस्से का बोझ उठा रही हैं इसके बावजूद कम्पनी को इस साल 8,570 करोड़ रुपए की ‘अंडर रिकवरी’ होने का अनुमान है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने के साथ इसमें और वृद्धि भी हो सकती है।
इंडियन ऑयल अध्यक्ष सार्थक बेहुरिया ने कहा कि सरकार और तेल कम्पनियां तो बढ़ते दाम से पड़ने वाले बोझ को वहन कर रही हैं लेकिन जनता से इसकी वसूली नहीं की जा रही है। सरकारी फॉर्मूले के मुताबिक जनता से भी कुल नुकसान की एक-तिहाई घाटे की वसूली की जानी चाहिए। उल्लेखनीय है कि तेल कम्पनियों को पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और मिट्टी तेल की घटे दाम पर बिक्री से इस साल 55,000 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय जब अंतर्राष्ट्रीय तेल कम्पनियां भारी मुनाफा कमा रही हैं और शेयर बाजार नित नए कीर्तिमान बना रहा है, घरेलू पेट्रोलियम मार्केटिंग कम्पनियां मुनाफा दर्ज करने के लिए सरकारी बॉन्ड पर निर्भर हैं और उनके शेयर मंदी में चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंडियन ऑयल की बाजार उधारी 28,000 करोड़ रुपए पर चल रही है, जबकि उसके सामने 12,000 करोड़ रुपए तक की योजनाएं लम्बित पड़ी हैं।
घरेलू पेट्रोलियम विपणन कम्पनियों की वर्तमान स्थिति पर खेद जताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें ‘बॉन्ड पत्र’ नहीं बल्कि नकदी चाहिए। सरकार ने तेल कम्पनियों के नुकसान की भरपाई के लिए जो फार्मूला तैयार किया है उसमें जनता के हिस्से में भी एक-तिहाई बोझ डाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति में इंडियन ऑयल को पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से रोजाना करीब 100 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है और यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने का सिलसिला जारी रहता है तो नवम्बर से दैनिक नुकसान 120 करोड़ रुपए पर पहुंच जाएगा।
बेहुरिया ने कहा कि तेल कम्पनियों को वर्तमान मूल्यों पर पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री से पेट्रोल पर 3.90 रुपए, डीजल पर 6.22 रुपए, मिट्टी तेल पर 15.99 रुपए प्रति लीटर और रसोई गैस सिलेंडर पर 174.17 रुपए प्रति सिलेंडर का नुकसान हो रहा है।
जिस तेजी से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं और भारतीय खरीद मूल्य में भी वृद्धि हो रही है उसे देखते हुए नवम्बर में ‘अंडर रिकवरी’ पेट्रोल पर करीब चार रुपए, डीजल पर साढ़े छह रुपए, मिट्टी तेल पर करीब साढ़े सोलह रुपए और घरेलू गैस सिलेंडर पर 200 रुपए के पार चली जाएगी।
बेहुरिया ने कहा कि कम्पनी का रिफाइनरी मार्जिन दूसरी तिमाही में करीब छह डॉलर प्रति बैरल रहा है जबकि पिछले साल इस तिमाही में यह आधा डॉलर से भी कम था। पहली छमाही में यह पिछले साल के 3.13 डॉलर के मुकाबले इस साल 8.44 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
कम्पनी के पाइपलाइन नेटवर्क में भी अच्छी कमाई हुई है इसके अलावा सरकार की तरफ से पहली छमाही में नुकसान की भरपाई के लिए 6,362.25 करोड़ रुपए के बॉन्ड जारी करने का भरोसा मिला है इन सबकी बदौलत कम्पनी को दूसरी तिमाही में 3,818 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ है जबकि पिछले साल उसे इस अवधि में 2,884 करोड़ रुपए का लाभ हुआ था। बॉन्ड मिलने की बदौलत यह वृद्धि 32 प्रतिशत की रही है। अप्रैल से सितम्बर की पूरी छमाही में कम्पनी का मुनाफा 25.7 प्रतिशत बढ़कर 5,286 करोड़ रुपए हो गया।
कम्पनी की दूसरी तिमाही में कुल कमाई पिछले साल के 50,357 करोड़ रुपए के मुकाबले घटकर 49,786 करोड़ रुपए रह गई। लेकिन अन्य आय के मद में 1,270 करोड़ रुपए मिलने और ब्याज अदायगी में मामूली कमी आने तथा 6,362.25 करोड़ रुपए की बॉन्ड राशि शामिल कर लिए जाने के बाद कम्पनी ने मुनाफा अर्जित कर लिया है।
बेहुरिया ने कहा कि सर्दियों का मौसम शुरू हो गया है, पेट्रोलियम उत्पादों की पूरी दुनिया में खपत बढ़ जाती है, तेल कम्पनियां अपने हिस्से का बोझ उठा रही हैं इसके बावजूद कम्पनी को इस साल 8,570 करोड़ रुपए की ‘अंडर रिकवरी’ होने का अनुमान है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने के साथ इसमें और वृद्धि भी हो सकती है।
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