गुवाहाटी। मंदी के दौर से गुजर रहे भारतीय चाय उद्योग ने चाय का उत्पादन बढ़ाने और गुणवत्ता सुधारने की रणनीति पर अमल करना शुरू कर दिया है। सस्ती चाय उत्पादित करने वाले देशों की ओर से मिल रही चुनौती के बावजूद भारतीय चाय उद्योग का हौसला बढ़ रहा है।
वाणिज्य राज्य मंत्री जयराम रमेश ने एक बातचीत में कहा कि चाय उद्योग की सेहत सुधारने के लिए बनाई गई नई रणनीति का उद्देश्य चाय का उत्पादन और चाय की गुणवत्ता दोनों में सुधार करना है। उन्होंने कहा कि हमें सकारात्मक परिणाम मिल रहे है और वर्ष 2007 चाय उद्योग के लिए अच्छा वर्ष साबित होने जा रहा है। चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चाय उत्पादक देश है।
पिछले साल भारत ने रिकॉर्ड 95.5 करोड़ किलोग्राम चाय का उत्पादन किया। अकेले पूर्वोत्तर राज्य असम की भारतीय चाय उद्योग में करीब 55 फीसदी की भागीदारी है। 1.5 अरब डॉलर वाला भारतीय चाय उद्योग 1998 से ही मंदी की मार झेल रहा है और निर्यात में गिरावट का सिलसिला जारी रहा है। लेकिन हाल में चाय उद्योग की सेहत में सुधार के संकेत मिलने लगे है।
Saturday, 1 September 2007
आठ हजार टन दाल आयात की योजना
नई दिल्ली। घरेलू उपलब्धता बढ़ाने और मूल्य नियंत्रित रखने के प्रयासों के तहत सरकार ने अक्टूबर तक आठ हजार टन दालों के आयात की योजना बनाई है। आयात की जाने वाली दालों में अरहर, मसूर और उड़द शामिल होंगी। यह काम सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी पीईसी के जरिए होगा।
पीईसी के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने आयात के लिए टेंडर मांगे हैं। यह छह सितंबर को बंद हो जाएंगे। आयात में 4000 टन अरहर, 3000 टन मसूर और एक हजार टन उड़द की दाल शामिल होगी। सरकार ने अप्रैल में घोषणा की थी कि आपूर्ति और मांग के अंतर को पाटने के लिए वह इस साल 15 लाख टन दालों का आयात करेगी। इससे दालों की कीमत को स्थिर रखने में भी मदद मिलेगी। अब तक 10.38 लाख टन दालों के आयात का ठेका दिया जा चुका है। इसमें से दो लाख टन से कुछ अधिक माल देश में पहुंच चुका है। शेष दाल की आपूर्ति भी जल्द ही होने की उम्मीद है।
पीईसी के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी ने आयात के लिए टेंडर मांगे हैं। यह छह सितंबर को बंद हो जाएंगे। आयात में 4000 टन अरहर, 3000 टन मसूर और एक हजार टन उड़द की दाल शामिल होगी। सरकार ने अप्रैल में घोषणा की थी कि आपूर्ति और मांग के अंतर को पाटने के लिए वह इस साल 15 लाख टन दालों का आयात करेगी। इससे दालों की कीमत को स्थिर रखने में भी मदद मिलेगी। अब तक 10.38 लाख टन दालों के आयात का ठेका दिया जा चुका है। इसमें से दो लाख टन से कुछ अधिक माल देश में पहुंच चुका है। शेष दाल की आपूर्ति भी जल्द ही होने की उम्मीद है।
Friday, 31 August 2007
अपोलो ने जावेटा का अधिग्रहण किया
देश के जाने-माने अस्पताल समूह अपोलो ने अटलांटा स्थित बीपीओ कंपनी जावेटा का 697 करोड़ रुपये में अधिग्रहण कर लिया है। यह सौदा कंपनी की आउटसोर्सिग यूनिट अपोलो हेल्थ स्ट्रीट के जरिए किया गया है। अधिग्रहण के लिए बैंक आफ इंडिया और बर्कले बैंक 550 करोड़ रुपये की वित्तीय मदद देंगे। कंपनी शेष राशि आंतरिक संसाधनों के जरिए जुटाएगी।
अपोलो समूह के चेयरमैन प्रताप सी. रेड्डी ने यहां बताया कि इस अधिग्रहण से ग्लोबल स्तर पर अपोलो हेल्थ स्ट्रीट विशालतम बीपीओ कंपनी बन जाएगी।
अपोलो समूह के चेयरमैन प्रताप सी. रेड्डी ने यहां बताया कि इस अधिग्रहण से ग्लोबल स्तर पर अपोलो हेल्थ स्ट्रीट विशालतम बीपीओ कंपनी बन जाएगी।
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